आप यहां असर की नमाज का तरीका, असर की नमाज की रकात और असर की नमाज की नियत कैसे करे आसान लफ्जो में पढ़ सकते हैं। इसके अलावा असर की नमाज का टाईम और फजीलत क्या है।
प्यारे इस्लामी भाईयो अस्सलामो अलैकुम, अल्लाह ताला ने हम सब मुसलमानो पर एक दिन में 5 वक्त की नमाज़ फर्ज़ की है। नमाज़ पढ़ने से दिल को सुकून मिलता है, नमाज़ हमारे प्यारे आका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आंखों की ठंडक है। हर मुसल्मान को चाहिये को दिन में 5 वक्त नमाज़ अदा करे
asar ki namaz ka time kab se kab tak hai : असर की नमाज़ का टाईम कब से कब तक है
असर की नमाज़ का टाइम सूरज डूबने से पहले होता है। अमुमन असर की नमाज़ का टाइम अलग शहरों मैं अलग होता है। आप असर की नमाज़ सूरज के डूबने से 20 से 25 मिनट पहले पढ़ ले। असर की नमाज़ का सही टाइम जानने के लिए आप नमाज़ का टाइम टेबल देख सकते हैं।
asar ki namaz me kitni rakat hoti hai : Asar ki namaz ki rakat
असर की नमाज़ मैं 8 रकात होती है
नोट: हम लोग नमाज़ की रकतो को फ़र्ज़ से पहले और फ़र्ज़ के बाद गिनती करते हैं
- पहले 4 सुन्नत
- फिर 4 फ़र्ज़
Asar ki 4 ratakt sunnat ki kuch zaruri baate : असर की 4 रात सुन्नत की कुछ ज़रुरी बातें
असर की 4 रकत सुन्नत गैर मुक्तदा, गैर मुक्तदा मतलब होता है की, पढ़ोगे तो सबाब मिलेगा, नहीं पढ़ोगे तो अज़ाब नहीं है। मतलाब अगर किसी वजह से 4 रकात सुन्नत नहीं पढ़ पाए, जमात खड़ी होने वाली है, तो पहले आप जमात के साथ फर्ज पढ़ ले। 4 रकात सुन्नत की कज़ा वाजिब नहीं।
नोट: याद रहे की असर की 4 रक्त सुन्नत बिना किसी वजह के छोड़ना नहीं चाहिए।
Asar ki 4 rakat sunnat ki niyat kaise karni chahiye : असर की 4 रकात सुन्नत की नियत कैसी करनी चाहिए
पहले वुज़ू कर ले, फ़िर किबले की तरफ मुंह के लिए खड़े हो जाएँ और नियत करे (नमाज़ पढ़ने की शर्तें क्या होती है, आप हमारी पहले की पोस्ट में पढ़ सकते हैं)।
नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, सुन्नत रसूल अल्लाह के, वास्ते अल्हा ताला के वक्त ए असर मुह मेरा तरफ़ काबे शरीफ के अल्लाह हु अकबर।
नोट: नियत करते वक्त अपने दोनों हाथो की हथेली के रुख को भी क़िबले की तरफ़ रखे
नियत करने के बाद अल्लाह हु अकबर कहते हुए दोनो हाथ अपनी नाफ के नीचे बांध ले
- पहले अऊ़ज़ु बिल्लाही मिनश्शैत़ुआ निर्रजीम” बिस्मिल्लाह हिर रहमान निर रहीम पढ़ें
- फिर सना पढ़े, सना के लफ्ज़ ये होते हैं सुवहाना क़ल्लाहुम्मा वा बिहमदिका
- फिर सुरेह ए फातिहा पढे, सुरेह ए फातिहा के लफ्ज़ ये होते हैं अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बील आलामीन
- फिर एक सुरे पढ़ ले, जो भी आपके याद हो
फिर आप अल्लाह हु अकबर कहते हुए रुकु में चले जाएं, रुकू इस तरह से करे की आपका सर और कमर बराबर हो जाए, आप अपने हाथ अपने घुटनो पर रखे और 3, 5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बियल अज़ीम पढ़े।
रुकू से सीधे खड़े होते होते टाईम समी अल्लाह हुलिमन हमीदह पढ़े फिर 1 या 2 सेकेंड रुक के रब्बाना लकल हम्द कहे और अल्हा हू अकबर कहते हुए सजदे में चले जाएं।
सजदा इस तरह से करे की पहले आपकी नाक जमीन पर लगे फिर आपका माथा और आपके दोनो हाथ जमीन से ऊपर रहे, और हाथ के पंजो को दोनो कानो के नीचे रखे, फिर आप 3,5 या 7 मर्तबा सुवहाना रब्बियल आला पढे।
फिर अल्लाह हु अकबर कहते हुए सजदे से खड़े हो जाएं दुसरी रकात के लिए
Asar ki sunnat namaz ki dusri rakat : असर की सुन्नत नमाज़ की दुसरी रकात
- सबसे पहले अऊ़ज़ु बिल्लाही मिनश्शैत़ुआ निर्रजीम” बिस्मिल्लाह हिर रहमान निर रहीम पढ़ें।
- फिर सुरेह ए फ़ातिहा पढे
- फिर कुरान की कोई भी एक सुरेह जो भी आपके याद हो पढ़ ले
फिर आप पहले की तरह अल्हा हू अकबर कहते हुए रुकू में चले जाएं और 3,5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बियल अज़ीम पढ़े।
फिर समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए रुकु से खड़े हो जाएं कुछ सेकंड रुक के रब्बाना लकल हम्द कहे और अल्हा हू अकबर कहते हुए सजदे में चले जाएं। सजदे मैं जा के 3, 5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बिल आला पढ़े।
फिर आप दो ज़ानो हो कर बैठा जाए
दो ज़ानो हो कर बैठने के बाद आप अत्तहियात पढे, अत्तहियात पढते वक्त जब आप अशहदू अल्लाह पर आयें तो अपनी शाहादत की उंगली को उठा ले और जब आप इलाहा पर आयें तो उंगली को नीचे कर ले।
अल्ल्हा हु अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
नोट: याद रहे असर की 4 रकात सुन्नत और वक्त की सुन्नत नमाज़ से थोड़े अलग तरीके से पड़ी जाती है, आज हम यहां आपको तफसील से बताएँगे की ये नमाज़ और सुन्नतो से अलग कैसे पड़ी जाती है।
- सबसे पहले आप अऊ़ज़ु बिल्लाही मिनश्शैत़ुआ निर्रजीम” बिस्मिल्लाह हिर रहमान निर रहीम पढ़ें
- फिर आप सना पढे (असर की 4 सुन्नत के अलावा जितने भी 4 रकत सुन्नत पड़ी जाती है सब में ही तीसरी रकात में सूरह फातिहा से शुरू किया जाता है लेकिन जब बात असर की 4 रकात की आती है, तो यहाँ हम सना से शुरू करते हैं।)
- फिर आप सूरह फातिहा पढे
- उसके बाद आपके क़ुरान की कोई भी एक सुरेह पढ़ ले जो भी आपको याद हो
और अल्ला हू अकबर कहते हुए रुकु में चले जाएं, रुकू बिलकुल पहले की ही तरह कर ले। फिर आप सजदा कर ले।
फिर आप चौथी रकात के लिए खड़े हो जाएं, चौथी रकात आप दूसरी रकात की तरह पढ़े, चौथी रकात मैं जब आप सजदा कर के दो ज़ानो हो कर बैठ जाए।
- दो ज़ानो हो कर बैठने के बाद पहले आप अत्तहिय्यात पढे
- फिर दुरूद ए इब्राहिम पढे
- फिर दुआ ए मसुरा या फिर रब्बना अतिना फिद्दुन्या पढे
- और सलाम फेर ले
Salam Pherene ka tarika : सलाम फेरने का तरीका
पहले आप अपने दाएं कंधे की तरफ देखे और पढ़े अस्सलामुअलैकुम वारहमतुल्लाह फिर आप बाएं कंधे की तरफ देखे और पढ़े असलमुअलैकुम वारहमतुल्लाह।
ये आपकी 4 रकात सुन्नत की नमाज़ मुकममल हो गई।
असर की 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़ पढ़ने का तरीका
फ़र्ज़ नमाज़ 2 तरह से पढ़ी जाती है या तो आप खुद से ही पढ़ रहे हैं फिर इमाम साहब के पीछे जमात से पढ़ रहे हैं, हम यहाँ 4 रकात नमाज़ इमाम साहब के पीछे जमात से पढ़ने का तरीका बताएंगे।
जब इमाम साहब नमाज़ पढ़ने के लिए खड़े हो जाएं, आप लोग भी इमाम साहब के पीछे जमात में खड़े हो जाएं।
सबसे पहले इमाम साहब नीयत करेंगे और अल्हा हू अकबर जोर से बोल कर नीयत बांध लेंगे तो आप भी नीयत कर ले, और अल्लाह हु अकबर कहते हुए नीयत बांध ले अपनी नाफ के नीचे।
असर की नमाज़ के 4 रकात फर्ज़ की नीयत का तरीका (इमाम साहब के पीछे)
नियत की मैने 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़, फ़र्ज़ वास्ते अल्लाह ताला के, वक़्त ए असर पीछे इस इमाम के मुह मेरा तरफ़ काबे शरीफ़ के अल्लाह हु अकबर।
अगर आप फ़र्ज़ की ख़ुद से पढ़ रहे हैं तो नियत करने का तरीका
नियत की मैने 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़, फ़र्ज़ वास्ते अल्हा ताला के वक़्त ए असर मुह मेरा तरफ़ काबे शरीफ़ के अल्लाह हु अकबर।
नोट: आपको सिर्फ पीछे इस इमाम के नहीं कहना है।
- अल्लाह हु अकबर कहते हुए नियत बांध ले
- आपको सिर्फ सना पढ़ना है और कुछ नहीं। सना सिर्फ पहली ही रकात में पढ़ना है और किसी भी रकात में नहीं पढ़ना है।
- इमाम साहब सना के बाद सुरेह फातिहा पढ़ाएंगे
- फिर कोई एक सुरेह पढेंगे
और अल्लाह हु अकबर कहते हुए रुकु में चले जाएंगे, आपको भी इमाम साहब के पीछे रुकु में चले जाना है
रुकू में 3,5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बियल अज़ीम पढ़े फिर इमाम साहब समी अल्लाहु लिमन हमीदह ज़ोर से पढते हुए रुकू से सीधे खड़े हो जाएंगे आपको भी सामी अल्लाहु लिमन हमीदह और रब्बाना लकल हम्द कहते हुए खड़े हो जाना है।
फिर इमाम साहब अल्ला हू अकबर कहते हुए सजदे में जाएंगे, आपको भी अल्लाह हू आकर कहते हुए इमाम साहब के पीछे पीछे सजदे में चले जाना है।
सजदे में आप 3, 5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बिल आला पढे, फिर इमाम साहब अल्लाह हु अकबर कहते हुए दो ज़ानो हो कर बैठ जाएंगे 2-3 सेकेंड के लिए तो आप भी ऐसा ही करें। फिर इमाम साहब अल्लाह हु अकबर कहते हुए दूसरा सजदा करेंगे, आप भी इमाम साहब के पीछे पीछे दूसरे सजदे में चले जाएंगे, सजदे में 3, 5 या 7 मरतबा सुवहाना रब्बिल आला पढ़े।
फिर इमाम साहब अल्लाहु हु अकबर कहते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे, आप भी अल्लाह हु अकबर कहते हुए दसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
Farz Namaz ke dusri rakat ka tarika : फ़र्ज़ नमाज़ की दुसरी रकात का तरीका
दूसरी रकात बिलकुल पहली रकात की तरह पढ़ ले, इमाम साहब के पीछे। जब दूसरी रकात का दूसरा सजदा करेंगे तो इमाम साहब दो ज़ानो हो कर बैठ जाएंगे, आप भी इमाम साहब के पीछे दो ज़ानो हो कर बैठ जाएं।
पहले आप अत्तहियात पढ़े, अत्तहियात पढते वक्त जब आप अशहदू आल्हा पे आएं तो अपनी शहादत की उंगली को उठा ले और जब आप इलाहा पर ऐ तो उंगली को नीचे कर ले।
फिर इमाम साहब अल्लाह हु अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे, आप भी उनके पीछे तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
तीसरी और चौथी रकात भी बिलकुल पहली और दूसरी रकात की तरह पढ़ ले, जब चौथी रकात का दूसरा सजदा कर ले। इमाम साहब अल्लाह हु अकबर कहते हुए दो ज़ानो हो कर बैठे जाएंगे, तो आपको भी दो ज़ानो हो कर बैठ जाना है।
- सबसे पहले आप अत्तहियात पढ़े
- फिर आप दुरूद ए इब्राहिम पढे
- फिर दुआ ए मसूरा या रब्बाना अतिना पढे
- फिर इमाम साहब सलाम फेरेंगे, आप भी उनके साथ साथ सलाम फेर ले
Salam pherne ka tarika : सलाम फेरने का तरीका
पहले आप अपने दाएं कंधे की तरफ देखे और पढ़े अस्सलामुअलैकुम वारहमतुल्लाह फिर आप बाएं कंधे की तरफ देखे और पढ़े असलमुअलैकुम वारहमतुल्लाह।
फिर इमाम साहब दुआ करने के लिए हाथ उठाएंगे तो आप उनके पीछे आमीन कहते रहें।
ये आपकी असर की नमाज़ मुकममल हो गई।
नमाज़ के बाद दुआ करने का तरीका
- पहले आप हुज़ूरे अनवर सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम के लिए दुरूद पढ़ ले
- फिर आप अल्लाहुम्मा अंतस सलाम सुरे पढे
- फिर आप रब्बाना अतिना फिद दुनिया सुरे पढे
- फिर आप रब्बी जलनी मुकीमस सलाती सुरे पढे
फिर अपनी दुआ में हुज़ूरे अनवर सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम का वास्ता दे के अल्लाह से दुआ करे इंशा अल्लाह आपकी दुआ कबूल होगी। रो रो कर अपने गुनाहो की माफ़ी मांगे, अल्लाह ताला सारे गुन्हा माफ़ कर देगा, वो बहुत गफ़ूरुर रहीम है। माफ़ करने वाला है. दुआएं कबूल करने वाला है.
Asar Ki namaz ki fazilat : असर की नमाज़ की फ़ज़ीलत
- अल्लाह ताला उस बंदे पर अपना खास रहम करता है जो असर की 4 सुन्नत अदा करता है
- दुसरी रिबायत में आया है की, जो बंदा असर की 4 रकात सुनत पढ़ता है, अल्लाह ताला उस बंदे के जिस्म पर आग को हराम फरमा देग़ा।
- एक रिबायत में ये भी आया है की, जुमे के दिन असर के वक्त से मगरिब के वक्त तक जो भी जाईज़ दुआ की जाए वो अल्लाह ताला कुबूल कर लेता है।
Namaz ki kuch zaruri baate : नमाज़ की कुछ ज़रुरी बातें
- जब आप नियत करने के लिए दोनो हाथ उठाएं तो, हाथो की हथेली को किबले की तरफ कर ले जिस से आपकी उंगलियों का रुख भी क़िबले की तरफ हो जाए।
- नियत करने के बाद जब आप हाथो को नाफ के नीचे बांध ले तो आपके दाएं हाथ की 3 उंगली बाएं हाथ के कलाई के ऊपर रहे
- जब आप रुकु करे तो आपके हाथो का पंजा आपके घुटनो पर रहे, और आपकी उंगली घुटनो के चारो तरफ रहे
- जब आप सजदे में जाए तो पहले आपकी नाक जमीन पर लगे फिर आपका माथा, सजदे के दौरान, आपके दो हाथ आपके कानो के नीचे, और आपके पैरों के दो पंजे की कम से कम 3 -3 उंगलियों के पेट जमीन से लगते हो।
- सजदे के दौरान आपकी राने आपके पेट से नहीं मिलनी चाहिए
- फिर जब आप दो ज़ानो हो कर बैठ जाए तो आपकी निगाहें अपनी गोद में रखे,
- आप अपने बाएं पंजे पर बैठे जाएं और दाये पंजे को इस तरह रखे की आपके पैर की कम से कम 3 उंगलियों के पेट ज़मीन से लग जाये। 5 उंगलियों के पेट ज़मीन से लग जाये तो बहुत बेहतर है।
- नमाज़ धीरे धीरे पढे, नमाज़ पढते वक्त कोई जल्दबाजी नहीं करे
- जल्दबाजी की नमाज़ अल्लाह को पसंद नहीं है।
Conclusions : नतीजा
आज हमने इस पोस्ट में असर की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका क्या होता है, असर की नमाज़ मैं कितनी रकात होती होती है, नमाज़ की नियत कैसे करे के वारे में तफ़सील से बताया है। इसके अलवा इमाम साहब के पीछे नमाज़ कैसे पढ़े, असर की नमाज़ की फ़ज़ीलत क्या है इसके वारे मैं बात की है। उम्मेद करता हु की ये पोस्ट आपको पसंद आएगी इंशा अल्लाह। आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे, जिस से हर मुसलमान को नमाज़ का सही तरीका पता लग जाए।
इस पोस्ट को लिखने या कहने में कोई गलती हो गई हो तो अल्लाह ताला से दुआ है की वो हुज़ूरे अनवर सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम के सदके से माफ कर दे।