क्या आपको पता है की दूसरा कलमा शहादत को कैसे और कब पढ़ा जाता है, दूसरे कलमा शहादत का तरजुमा क्या होता है? इसके अलावा दूसरा कलमा शहादत की क्या क्या फ़ज़ीलते है।
सरकार ए दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्यारे दीवानो, अस्सलामो अलैकुम, Rozanamaz.org मैं आपका इस्तकबाल करता हूं, आज हम इस पोस्ट में दूसरा कलमा शहाद के वारे में तफ़सील से बात करेंगे।
पोस्ट को पूरा पढ़े, इंशा अल्लाह ताला आपको सही जानकारी मिलेगी, तो आईये शूरु करते हैं…
doosra kalma shahadat : दूसरा कलमा शहादत
जब मज़हबे इस्लाम शुरु हुआ तो इसके क़ानून क़ुरान और ह़दीसों के ज़रीये फैलाए गए , अब क्योंकि क़ुरान और ह़दीस में तो बहुत अलफ़ाज़ थे तो अंदेशा था ,कि कहीं आने वाली नसलें क़ुरान और ह़दीस को पढ़ न पाएं, अगर कुरान और हदीस को ना भी पढ़ें तो भी गुमराहियत की तरफ ना जाएं इसलिए कलमों का आग़ाज़ किया गया, क्योंकि इसमें कम अल्फ़ाज़ में मुकम्मल बयान कर दिया गया,कि एक अल्लाह की इबादत करनी है,एक रसूल को मानना है,नमाज़ क़ायम करनी है, गुनाहों से तौबा करना है, ज़कात देना है, और हज करना है, यह यह इस्लाम की बुनियादी बातें आम लोग भूल ना जाएं, इसलिए कलमों को बनाया गया ताकि आम लोग इसे आसानी से याद कर सकें ,क्योंकि इसमें कम अल्फ़ाज़ होते हैं और उन अ़क़ीदों को अपनी ज़िंदगी में हमेशा याद रखें और उन पर अमल करते रहे,
उन्हीं में से हम आज दूसरे कलमें के बारे में बात करेंगे कि वह कि वह कौन-कौन सी हदीसों से लिया गया है उसका तर्जुमा क्या है और अरबी में उसको कैसे पढ़े और हिंदी में कैसे पढ़ें |
- दूसरा कलमा शहादत और उसका तरजुमा
- दूसरा कलमा शहादत कौन-कौन सी हदीसों से लिया गया है?
doosra kalma shahadat aur uska tarjuma : दूसरा कलमा शहादत और उसका तरजुमा
दूसरा कलमा शहादत अरबी में : doosra kalma shahadat in arabic

दूसरा कलमा शहादत हिंदी में : doosra kalma shahadat in hindi
“अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह़दहु ला शरीका लहु व अशहदु अन्ना मुह़म्मदन अ़बदुहु व रसूलुहु “|
तरजुमा:- “मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं है, और मैं गवाही देता हूं कि मुह़म्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम उसके बंदे और रसूल हैं”|
इस कलमे की बहुत फज़ीलतें हैं, यह कलमा हदीसों में साफ-साफ मौजूद है, जिनमें से कुछ हदीसें हम यहां बयान करेंगे, और उनमें फजीलतें भी बयान करेंगे |
एक और हदीस में नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया
“क्या तुम में से कोई ऐसा शख्स नहीं है जो उहद पहाड़ के बराबर नेकी कर लिया करें अर्ज़ की वो कैसे या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ,
“आपने फ़रमाया हर शख्स कर सकता है “सुबह़ानअल्लाह” पढ़ने सवाब उहद से ज़्यादा है ,”ला इलाहा इल्लल्लाह” का सवाब उहद से ज़्यादा है, “अल्हम्दुलिल्लाह” का सवाब हद से ज़्यादा है, “अल्लाह हु अकबर” का सवाब उहद से ज़्यादा है |
एक और हदीस:-

तरजुमा:- हजरत अनस एमिनेम मालिक नबी ए करीम सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स अच्छी तरह बुजु करें और फिर तीन बार यह कलमा पड़े “अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुह़म्मदन अ़बदुहु व रसूलुहु “|
तो अल्लाह ताला उसके लिए जन्नत के 800 दरवाजे खोल देगा वह जिसे चाहे उस में दाखिल हो जाए |
जिस दुआ में ला इलाहा इल्लल्लाह हो उसकी कबूलियत का अंदाज़ लगाना मुश्किल है, क्योंकि बहुत सी ऐसी हदीसे हैं जिनमें यह फरमाया गया है कि अगर किसी दुआ में ला इलाहा इलल्लाह मौजूद हो तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त उसको कुबूल फरमा लेता है :-
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़िअल्लाहुतआ़ला अन्हु से रिवायत है
मफहूम:-
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त कयामत के दिन उस शख्स को बुलाएगा, कि जिसके नाम-ए- आ़माल गुनाहों से भरे पड़े होंगे तो अल्लाह तआ़ला उससे पूछेगा क्या तेरे पास कोई उज़्र है तो वह कहेगा मौला मेरे पास कोई उज़्र नहीं है तो फिर एक कागज़ का पर्चा लाया जाएगा और उसके 99 अमाल जो गुनाहों से भरे पड़े होंगे तराज़ू के एक पल्ले में रखे जाएंगे, और वह टुकड़ा एक पल्ले मैं रखा जाएगा, कलमा शहादत वाला यह परचा उसके बुरे आ़मालों पर भारी पड़ जाएगा| और उसको माफी मिल जाएगी, और वह जन्नत का हक़दार हो जाएगा” |
एक और हदीस:-

तरजुमा:-
” हज़रत उ़बादा इब्ने सामित रज़िअल्लाहुतआ़ला अन्हू से रिवायत है, हुजूर नबीये अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है, वह एक है, उसका कोई शरीक नहीं है, और बेशक मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम उसके बंदे और उसके रसूल हैं, और बेशक ईसा अलैहिस्सलाम भी अल्लाह तआला के बंदे हैं, जो हज़रत मरियम की तरफ भेजे गए|और उनकी रूह है ,और जन्नत और दोज़ख ह़क़ हैं,तो अल्लाह तआ़ला उसको जन्नत में दाख़िल करेगा चाहें उसके अ़मल कुछ भी हों.
Conclusions : नतिजा
आज हमने इस पोस्ट में दूसरा कलमा शहादत के बारे में बात की है, हमने बताया है की दूसरे कलमे का तरजुमा क्या होता है, दूसरे कलमे की फज़ीलते क्या है। इसके अलावा दूसरे कलमे को पढ़ने का सबाब कितना है।
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इस पोस्ट को लिखने मैं या कहने में कोई गलती हो गई हो तो अल्लाह से दुआ है की वो सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सदके से गलती को माफ कर दे।