क्या आप को पता है की पांचवे कलमे को कैसे पढ़ा जाता है, हमारे प्यारे आका सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पांचवे कलमे को कब पढ़ा करते थे। इसके अलावा आप यंहा पंचवा कलमा तरजुमे के साथ और पांचवे कलमे की फ़ज़ीलत पढ़ सकते हैं।
kalme kis liye banaye gaye : कलमे किस लिए बनाए गए
जब मज़हबे इस्लाम शुरु हुआ तो इसके क़ानून क़ुरान और ह़दीसों के ज़रीये फैलाए गए , अब क्योंकि क़ुरान और ह़दीस में तो बहुत अलफ़ाज़ थे तो अंदेशा था ,कि कहीं आने वाली नसलें क़ुरान और ह़दीस को पढ़ न पाएं, अगर कुरान और हदीस को ना भी पढ़ें तो भी गुमराहियत की तरफ ना जाएं इसलिए कलमों का आग़ाज़ किया गया, क्योंकि इसमें कम अल्फ़ाज़ में मुकम्मल बयान कर दिया गया,कि एक अल्लाह की इबादत करनी है,एक रसूल को मानना है,नमाज़ क़ायम करनी है, गुनाहों से तौबा करना है, ज़कात देना है, और हज करना है, यह यह इस्लाम की बुनियादी बातें आम लोग भूल ना जाएं, इसलिए कलमों को बनाया गया ताकि आम लोग इसे आसानी से याद कर सकें ,क्योंकि इसमें कम अल्फ़ाज़ होते हैं और उन अ़क़ीदों को अपनी ज़िंदगी में हमेशा याद रखें और उन पर अमल करते रहे, 2 कलमें तो हदीस में साफ-साफ लिखे हुए हैं लेकिन बाक़ी के कलमे उ़लमाय दीन ने अलग-अलग हादीसों से अल्फाज़ों को उठाकर बनाया है |
उन्हीं में से हम आज पांचवें कलमें के बारे में बात करेंगे कि वह कि वह कौन-कौन सी हदीसों से लिया गया है उसका तर्जुमा क्या है और अरबी में उसको कैसे पढ़े और हिंदी में कैसे पढ़ें
- पांचवा कलमा और उसका तरजुमा
- पांचवा कलमा कौन-कौन सी हदीसों से लिया गया है?
Panchwa Kalma Astaghfaar aur uska tarjuma : पांचवा कलमा इस्तिग़फार और उसका तरजुमा
Panchwa Kalma Astaghfaar arbi me : पांचवा कलमा इस्तिग़फार अरबी में

Panchwa Kalma Astaghfaar hindi me : पांचवा कलमा इस्तिग़फ़ार हिंदी में

तरजुमा:- ” मैं अपने पालने वाले अल्लाह से माफी मांगता हूं, हर उस गुनाह की जो मैंने जानबूझकर किया, या भूलकर छुपकर किया या ज़ाहिर होकर, और मैं उसकी बारगाह में तौबा करता हूं ,उस गुनाह की जिसे मैं जानता हूं, और उस गुनाह की भी जिसे मैं नहीं जानता, ऐ अल्लाह बेशक तू ग़ैबों को जानने वाला है, ऐबों को छुपाने वाला और गुनाहों को बख़्शने वाला है और गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी करने की क़ुव्वत नहीं मगर अल्लाह की मदद से जो बहुत बुलंद अज़मत वाला है”
5 में कलमें का तर्जुमा भी हो गया और कलमें को हिंदी और अरबी में भी समझ लिया अब बात करते हैं कलमा कौन सी हदीस हो से लिया गया है यह तो साफ तौर पर ज़ाहिर नहीं है, कि कलमा कौन सी हदीस से लिया गया है, हां लेकिन जो मअ़ना या जो लफ़्ज़ इस कलमें में इस्तेमाल हुए हैं ऐसे ही लफ्ज़ों की बेशुमार हदीसें मिलती हैं, जिनमें से कुछ हम याहां बयान करने की कोशिश करेंगे ताकि आप लोगों को मालूम हो जाए कि कलमों को पढ़ना कितना फायदेमंद होता है और इसकी अहमियत भी हमें मालूम हो जाए |
बुखारी शरीफ में है

तरजुमा:- ” शद्दाद इब्ने ऑस कहते हैं,
कि नबीए करीम सल्लल्लाहो ताआ़ला अलैही वसल्लम ने फरमाया ” “ऐ अल्लाह तू मेरा रब है तेरे सिवा कोई माबूद नहीं है तूने ही मुझे पैदा फरमाया और मैं तेरा ही बंदा हूं जो तेरी ज़िम्मेदारी और तेरे वादे पर हूं जिस कदर मुझे इस्तिताअ़त हो, मैं तेरी पनाह मांगता हूं उस चीज़ के शर से जो मेरी तक़दीर में है,और मैं तेरी नेअ़मतों की तरफ रुजु करता हूं और तू ही मेरे गुनाहों को माफ कर दे क्योंकि मेरे गुनाहों को सिर्फ तू ही माफ कर सकता है” कुछ अल्फ़ाज़ ऐसे हैं जो इस हदीस से भी लिए गए हैं,
मुसन्निफ इब्ने अबी शैबा में है

तरजुमा:- “शद्दाद इब्ने ऑस कहते हैं,
कि नबीए करीम सल्लल्लाहो ताआ़ला अलैही वसल्लम ने फरमाया लोगों का खज़ाना सोना और चांदी है तुम इन कलिमात को अपना खज़ाना बना लो “
” अल्लाह मैं तुझसे सवाल करता हूं तेरी नेमतों के शुक्र का और मैं तुझसे हुस्ने इबादत का सवाल करता हूं, और मैं तुझसे ऐसे दिल का सवाल करता हूं, जो सलामती वाला हो और मैं तुझसे सच्ची ज़बान का सवाल करता हूं, और हर उस भलाई का सवाल करता हूं जो तेरे इल्म में है, और हर उस शर से पनाह मांगता हूं,जो तेरे दिल में है और मैं उन तमाम गुनाहों की माफी मांगता हूं, जो तू जानता है बेशक तू ही तमाम छुपी हुई बातों को जानने वाला है”
इसी तरह तिर्मीज़ीऔर नसाई में भी है

तरजुमा:- ” इमरान इब्ने हुसैन से रिवायत है”,
नबीए करीम सल्लल्लाहो ताआ़ला अलैही वसल्लम ने फरमाया तू इस तरह कहे- ” ऐ अल्लाह तू मेरे उन गुनाहों को भी माफ फरमा दे जो मुझसे छुपे हैं ,या जाहिर हैं, और जो मैंने भूल कर या जानबूझकर किए , और जिन से मैं ना वाकिफ हूं ,या जिन्हें मैं जानता हूं”
सुनन इब्ने माजा में भी ऐसे ही अल्फ़ाज़ मिलते हैं-

तरजुमा:- ” अबू मूसा कहते हैं मैं यूं दुआ मांग रहा था,

आप सल्लल्लाहो तआ़ला अलैही वसल्लम ने फरमाया अब्दुल्ला इब्ने कैस क्या “मैं तुझे ऐसा कलमा ना बताऊं जो जन्नत के ख़ज़ानों में से है”
मैंने कहा क्यों नहीं या रसूलुल्लाह! तो आप सल्लल्लाहो तआ़ला अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया तू कहे “ऐ अल्लाह मैं तुझसे पनाह मांगता हूं कि मैं तेरे साथ किसी को शरीक करूं और मैं इस बात का इ़ल्म भी रखूं और मैं तुझसे अपने उन गुनाहों की माफी मांगता हूं जिन्हें मैं नहीं जानता”
Conclusions : नतिजा
आज हमने इस पोस्ट में पांचवे कलमे की मुकम्मल जानकरी शेयर की है, जैसे चौथे कलमे को कैसे पढ़ा जाता है, चौथे कलमे का तर्जुमा क्या है और चौथे कलमे की फज़ीलते क्या है।
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इस पोस्ट को लिखने मैं या कहने में कोई गलती हो गई हो तो अल्लाह से दुआ है की वो सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सदके से गलती को माफ कर दे।